ऐतरेय उपनिषद

ऐतरेय उपनिषद  एक शुक्ल ऋग्वेदीय  उपनिषद  है। ऋग्वेदीय  ऐतरेय  आरण्यक के अन्तर्गत द्वितीय आरण्यक के अध्याय 4, 5 और 6. का नाम ऐतरेयोपनिषद्...
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मानव जीवन का लक्ष्य

“भगवानने कहा है”- “माया बडी दुस्तर है”, इस माया से कोई भी सहज पार नही हो सकता, परंतु जो मेरी शरण मे आ जाता है, वह व्यक्ती इस माया से तर ...
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ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्म शब्द वीर्य, वेद, और ईश्वरवाचक है!  मरणासन्न समाज के लिये ब्रम्हचर्य हि संजीवनी विद्या है! शारीरिक तथा बौद्धिक बल का याही आधार है!...
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